उनके द्वारा लिखे गये “चेतावनी रा चुंग्ट्या” के कुछ दोहे (हिंदी अनुवाद के साथ),
पग पग भम्या पहाड,धरा छांड राख्यो धरम |
अनुवाद: भयंकर मुसीबतों में दुःख सहते हुए मेवाड़ के महाराणा नंगे पैर पहाडों में घुमे ,घास की रोटियां खाई फिर भी उन्होंने हमेशा धर्म की रक्षा की। मातृभूमि के गौरव के लिए वे कभी कितनी ही बड़ी मुसीबत से विचलित नहीं हुए उन्होंने हमेशा मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है वे कभी किसी के आगे नहीं झुके। इसीलिए आज मेवाड़ के महाराणा हिंदुस्तान के जन जन के हृदय में बसे है।
(अब) पेखँतां, फ़रमाण हलचल किम फ़तमल ! हुवै ||
अनुवाद: अनगिनत व भीषण युद्ध लड़ने के बावजूद भी मेवाड़ के महाराणा कभी किसी युद्ध से न तो विचलित हुए और न ही कभी किसी से डरे उन्होंने हमेशा निडरता ही दिखाई। लेकिन हे महाराणा फतह सिंह आपके ऐसे शूरवीर कुल में जन्म लेने के बावजूद लार्ड कर्जन के एक छोटे से फरमान से आपके मन में किस तरह की हलचल पैदा हो गई ये समझ से परे है।
गिरद गजां घमसांणष नहचै धर माई नहीं |(ऊ) मावै किम महाराणा, गज दोसै रा गिरद मे ||
अनुवाद: मेवाड़ के महाराणाओं द्वारा लड़े गए अनगिनत घमासान युद्धों में जिनमे हजारों हाथी व असंख्य सैनिक होते थे कि उनके लिए धरती कम पड़ जाती थी आज वे महाराणा अंग्रेज सरकार द्वारा 200 गज के कक्ष में आयोजित समरोह में कैसे समा सकते है? क्या उनके लिए यह जगह काफी है?
अब लग सारां आस , राण रीत कुळ राखसी |रहो सहाय सुखरास , एकलिंग प्रभु आप रै ||
अनुवाद: हे महाराणा फतह सिंह जी पुरे भारत की जनता को आपसे ही आशा है कि आप राणा कुल की चली आ रही परम्पराओं का निरवाह करेंगे और किसी के आगे न झुकने का महाराणा प्रताप के प्रण का पालन करेंगे। प्रभु एकलिंग नाथ इस कार्य में आपके साथ होंगे व आपको सफल होने की शक्ति देंगे।
मान मोद सीसोद, राजनित बळ राखणो |(ईं) गवरमेन्ट री गोद, फ़ळ मिठा दिठा फ़ता ||
अनुवाद: हे महाराणा सिसोदिया राजनैतिक इच्छा शक्ति व बल रखना। इस सरकार की गोद में बैठकर आप जिस मीठे फल की आस कर रहे है वह मीठा नहीं खट्ठा है।


0 टिप्पणियाँ